भारत ने यूएन में कहा- हमने मानवाधिकारों के लिए किया डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल

by Vimal Kishor

जिनेवा,समाचार10India-रिपोर्ट.शाश्वत तिवारी। भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में कहा कि हमने बड़े पैमाने पर सभी के अधिकारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल किया है। भारत ने नई तकनीक और डिजिटल टूल्स के सकारात्मक पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि इसने न्याय, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों, 1.4 अरब भारतीयों की डेमोक्रेटिक भागीदारी और हमारी महिलाओं के एम्पावरमेंट तक पहुंच को भी आसान बनाया है।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने  मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान जारी आम बहस में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए यह टिप्पणी की।

जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि जॉर्ज ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा हाल ही में दिए बयान को दोहराते हुए अपनी बात शुरू की, जिसमें डॉ. जयशंकर ने कहा था कि इस काउंसिल में हमारी बातचीत बयानों और प्रस्तावों से आगे बढ़कर सबसे कमज़ोर लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ठोस सुधार लाने पर होनी चाहिए।

जार्ज ने कहा हाल ही में नई दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में यह माना गया कि एआई की ताकत का सबसे अच्छा एहसास तभी होता है, जब इसके फ़ायदे मानवता के बीच बराबरी से बांटे जाएं, जिसमें ग्लोबल साउथ की भागीदारी भी शामिल है। आतंकवाद ह्यूमन राइट्स के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बना हुआ है। हमें इसके सभी रूपों का मुकाबला करने के अपने इरादे पर अडिग रहना चाहिए। इस काउंसिल को इस मुद्दे पर एक आवाज़ में बोलते रहना चाहिए।
इससे पहले सिबी जॉर्ज ने जिनेवा की अपनी इस यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की महासचिव डोरेन बोगदान-मार्टिन के साथ एक बैठक की, जिसमें सुरक्षित और समावेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे तथा वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव ने इसके अलावा साउथ सेंटर (विकासशील देशों का इंटरगवर्नमेंटल संगठन) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रो. कार्लोस कोर्रिया से मुलाकात की। उन्होंने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, समान ग्लोबल गवर्नेंस को बढ़ावा देने और सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विकासशील देशों के नजरिए ग्लोबल फैसले लेने को आकार दें। जॉर्ज ने जिनेवा में यूएन और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में काम कर रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी बातचीत की और पिछले दस सालों में भारत में हुए शानदार सोशियो-इकोनॉमिक बदलाव पर रोशनी डाली।

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