
लखनऊ,उत्तर:प्रदेश-समाचार10India। मेदांता लखनऊ के डॉक्टरों ने गंभीर जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे 3 दिन के नवजात का सफल पीडीए स्टेंटिंग प्रोसीजर किया। 4 किलो वजन के इस बच्चे के फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली पीडीए नाम की रक्त नली जन्म के तीसरे दिन बंद होने लगी थी, जिसके कारण उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन घटकर 50% हो गया। नवजात की जान बचाने के लिए इस रक्त नली को खुला रखना जरूरी था। डॉक्टरों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी के पीडीए में स्टेंट डालकर फेफड़ों तक खून का बहाव बनाए रखा। स्टेंट डालने के तुरंत बाद बच्चे का ऑक्सीजन सैचुरेशन बढ़कर 85% हो गया।
मेदांता लखनऊ के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. माहिम सरन और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रोली श्रीवास्तव ने यह चुनौतीपूर्ण प्रोसीजर किया। बच्चे को जन्मजात जटिल हृदय रोग था। उसके दिल में बड़ा छेद था, जिसे मेडिकल भाषा में वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है। इसके साथ ही उसके फेफड़ों तक खून ले जाने वाली मुख्य धमनी पूरी तरह विकसित नहीं थी, जिसे पल्मोनरी एट्रेसिया कहते हैं । ऐसे में फेफड़ों तक खून पहुंचाने का काम पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस यानी पीडीए नाम की एक प्राकृतिक रक्त नली के जरिए हो रहा था।
नवजात बच्चों में यह रक्त नली जन्म के कुछ दिनों बाद सामान्य तौर पर अपने आप बंद हो जाती है। लेकिन इस बच्चे के मामले में फेफड़ों तक खून पहुंचने के लिए इसी नली का खुला रहना जरूरी था। तीसरे दिन जब यह नली बंद होने लगी तो बच्चे का शरीर नीला पड़ने लगा और उसके खून में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो गई। अस्पताल पहुंचने पर उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन सिर्फ 50% था।
बच्चे की स्थिति को देखते हुए पीडीए स्टेंटिंग करने का फैसला लिया गया। इस प्रोसीजर में पीडीए के अंदर एक छोटा स्टेंट डाला जाता है, जो रक्त नली को खुला रखता है और फेफड़ों तक खून पहुंचने में मदद करता है।
प्रोसीजर से पहले जांच में पता चला कि बच्चे की पीडीए काफी लंबी, खड़ी और घुमावदार थी। बच्चे को ज्यादा देर तक ठंडे कैथ लैब के माहौल में रखने से बचाने के लिए फेमोरल रास्ते से एक एक्सेस एनआईसीयू में ही अल्ट्रासाउंड की मदद से लिया गया। प्रोसीजर के दौरान दूसरे रास्ते से भी एक्सेस लिया गया, जिसके जरिए स्टेंट को पीडीए तक पहुंचाया गया और उसकी सही जगह की जांच की गई।
स्टेंट डालने के तुरंत बाद बच्चे का ऑक्सीजन सैचुरेशन 50% से बढ़कर 85% हो गया। इससे पता चला कि स्टेंट के जरिए फेफड़ों तक खून का बहाव बेहतर हो गया है।
डॉ. माहिम सरन ने बताया कि ऐसे बच्चों में पीडीए का खुला रहना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसी के जरिए फेफड़ों तक खून पहुंचता है। अगर यह रास्ता समय से पहले बंद हो जाए तो बच्चे की स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में समय पर पीडीए स्टेंटिंग बच्चे के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प हो सकता है।
डॉ. रोली श्रीवास्तव ने बताया कि पीडीए स्टेंटिंग के जरिए कुछ बच्चों को ओपन हार्ट सर्जरी और बीटी शंट जैसे बड़े ऑपरेशन से बचाया जा सकता है। हालांकि, स्टेंट में खून का थक्का बनने और आगे चलकर दोबारा प्रोसीजर की जरूरत जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। इसके बावजूद ऐसे मामलों में अस्पताल में रहने का समय ओपन सर्जरी की तुलना में कम हो सकता है।

