लखनऊ में ओ.पी. श्रीवास्तव की दो पुरस्कृत फिल्मों का विशेष प्रदर्शन

गिरीश कासरवल्ली के सिने संसार से लेकर मां के निःस्वार्थ प्रेम तक, दर्शकों को दिखेगा सिनेमा का अलग रंग

by Vimal Kishor

 

 

लखनऊ,उत्तर:प्रदेश-समाचार10India। राजधानी के सिनेप्रेमियों के लिए शाम खास रही। रीलिज़्म फ़िल्म्स की ओर से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त फिल्मकार ओ.पी. श्रीवास्तव की दो चर्चित फिल्मों—‘लाइफ इन मेटाफर्स: अ पोर्ट्रेट ऑफ गिरीश कासरवल्ली’ और ‘बनवारी की अम्मा’—का विशेष प्रदर्शन नॉवेल्टी सिनेमा, लालबाग में किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित इस फिल्म प्रदर्शन में दर्शकों को सिनेमा के दो बिल्कुल अलग लेकिन संवेदनशील संसारों से रूबरू होने का अवसर मिला। अपने शहर के दर्शकों तक ओ.पी. श्रीवास्तव की फिल्मों को पहुंचाने की यह वार्षिक परंपरा लगातार चौथे वर्ष जारी रही।

‘लाइफ इन मेटाफर्स’ देश के प्रख्यात फिल्मकार गिरीश कासरवल्ली की सिने-दृष्टि, रचनात्मक सोच और समानांतर सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान की पड़ताल करती है। फिल्म में कासरवल्ली के रचनात्मक सफर और उनकी फिल्मों के पीछे की वैचारिक दुनिया को समझने की कोशिश की गई है। इस फिल्म को वर्ष 2015 में सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है।

दूसरी फिल्म ‘बनवारी की अम्मा’ सत्तर के दशक के उत्तरार्ध के लखनऊ की पृष्ठभूमि में मां के अटूट, निःस्वार्थ और भावनात्मक प्रेम की मार्मिक कहानी पेश करती है। पूरी तरह लखनऊ में फिल्माई गई यह फिल्म शहर की गलियों, परिवेश और मानवीय रिश्तों को बेहद आत्मीय अंदाज में पर्दे पर जीवंत करती है। फिल्म में पुराने लखनऊ की सामाजिक-सांस्कृतिक छवियां भी दर्शकों को आकर्षित करती हैं।

लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े ओ.पी. श्रीवास्तव ने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1977 में भारतीय स्टेट बैंक से व्यावसायिक जीवन की शुरुआत करने के बाद उन्होंने पीएनबी कैपिटल सर्विसेज और आईडीआरसीआरडीसी में भी कार्य किया। फिल्म निर्माण में आने से पहले उन्होंने भारत में तकनीक आधारित रिटेल बैंकिंग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी फिल्मों में सिनेमा, संस्कृति, सामाजिक सरोकार और पर्यावरण जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं। वे ‘बैंकिंग ऑन टेक्नोलॉजी’, ‘पिलर्स ऑफ पैरेलल सिनेमा’, ‘ब्रांडिंग@माइथोलॉजी’ और ‘कम बैक सून’ जैसी पुस्तकों के लेखक भी हैं। यह विशेष प्रदर्शन लखनऊ के दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ गंभीर और सार्थक सिनेमा से जुड़ने का अवसर भी बना।

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