
लखनऊ,उत्तर.प्रदेश- समाचार10India। जैन यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि रवि भूषण ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और भविष्य की चुनौतियों को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान दौर में शिक्षा का स्वरूप बदल चुका है और अब केवल पुस्तकीय ज्ञान छात्रों की सफलता के लिए पर्याप्त नहीं है।सर्वांगीण विकास है प्राथमिकता रवि भूषण ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में अब पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियाँ: छात्रों की प्रतिभा को निखारने के लिए खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा व्यक्तित्व विकास छात्रों के आत्मविश्वास और सॉफ्ट स्किल्स को बेहतर बनाना।व्यावहारिक ज्ञान: किताबी सिद्धांतों को वास्तविक जीवन और कार्यक्षेत्र में लागू करने का प्रशिक्षण।
AI और आधुनिक तकनीक का समावेश बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज का समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। तकनीक में हो रहे तीव्र बदलावों को देखते हुए कॉलेजों में AI और अन्य आधुनिक विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। उनका मानना है कि छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई तकनीकों से अवगत कराना अनिवार्य है।गुणवत्ता में सुधार की प्रतिबद्धता रवि भूषण ने पारदर्शिता बरतते हुए यह स्वीकार किया कि कुछ कॉलेजों में अभी भी शिक्षा का स्तर अपेक्षित मानकों तक नहीं पहुँच पाया है।
हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्थान इन कमियों को दूर करने और समय के साथ खुद को ढालने के लिए निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर रहे हैं।लक्ष्य: बेहतर कॉरपोरेट संस्कृति का निर्माण जैन यूनिवर्सिटी के विजन को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री बांटना नहीं है, बल्कि हमारा लक्ष्य ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो न केवल पेशेवर रूप से कुशल हों, बल्कि भविष्य में एक बेहतर कॉरपोरेट संस्कृति का निर्माण भी कर सकें।”इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेज मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं जहाँ छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्य और नेतृत्व क्षमता की शिक्षा भी मिल सके।

