यूएन मुख्यालय में ‘शून्य से अनंत तक’ प्रदर्शनी का जयशंकर ने किया उद्घाटन

by Vimal Kishor

न्यूयॉर्क,समाचार10India-रिपोर्ट.शाश्वत तिवारी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘शून्य से अनंत तक’ नामक विशेष प्रदर्शनी का, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर उद्घाटन करते हुए प्राचीन भारत के गणितीय ज्ञान को मानवता की ‘साझा विरासत’ बताया। उन्होंने कहा कि अतीत की विकृतियों को ठीक करके ही हम भविष्य के मुद्दों का सटीक समाधान कर सकते हैं। यह प्रदर्शनी यूएन में भारत के स्थायी मिशन द्वारा ‘संहिता’ कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई है, जिसमें आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कर और श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान गणितज्ञों के योगदान को दर्शाया गया है।

विदेश मंत्री ने प्रदर्शनी की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा गणित का वैश्विक प्रसार आपसी जुड़ाव की एक कहानी है। लेकिन विचारों की हर आपूर्ति श्रृंखला का एक शुरुआती बिंदु होता है, और अक्सर वह भारत होता है। वैज्ञानिक प्रगति की वैश्विक गाथा को बहुत लंबे समय से एक संकीर्ण नजरिए से देखा जाता रहा है, जो समय और भूगोल की सीमाओं में बधा हुआ है। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक उथल-पुथल एक राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन ला रही है, यह अनिवार्य रूप से एक सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।


डॉ. जयशंकर ने आगे लिखा प्रदर्शनी इस बात की याद दिलाती है कि गणित एक सार्वभौमिक भाषा है और इसके प्रसार ने वैश्विक भलाई में योगदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए सबसे सुस्थापित मंच के रूप में, संयुक्त राष्ट्र साझा सहयोग से होने वाले लाभों की वकालत करने के अपने प्रयासों में इस संदेश का उपयोग कर सकता है।

यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने विदेश मंत्री की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की उपस्थिति हमारे लिए सम्मान की बात है। यह प्रदर्शनी शुक्रवार, 15 मई तक ‘डेलीगेट्स एंट्रेंस’ पर प्रदर्शित रहेगी। मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूं कि आप यहां आकर उस योगदान को देखें, जो भारत ने सदियों से दुनिया की इस ‘सार्वभौमिक भाषा’ को दिया है।

अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि प्रौद्योगिकी और दुनिया के लोकतंत्रीकरण के लिए इतिहास का लोकतंत्रीकरण भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी केवल दीवारों पर लिखे नंबर नहीं, बल्कि उस सभ्यता का प्रमाण है, जो भारत की बौद्धिक मिट्टी में विकसित हुई है। उन्होंने बाइनरी सिस्टम का उदाहरण दिया, जिसे तीसरी शताब्दी में भारत में विकसित किया गया था और जो आज के डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का आधार है।

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