नवाबीन विरासत की रवायत को आगे बढ़ाकर गरीबों की खिदमत का संकल्प : सैयद मोहम्मद असद नवाब

गरीबों की ख़िदमत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मज़बूत करना हमारा मक़सद : सैयद मोहम्मद असद नवाब

by Vimal Kishor

 

लखनऊ,उत्तर:प्रदेश-समाचार10India। कभी अवध की राजधानी के तौर पर मशहूर लखनऊ की पहचान आज भी अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब और नवाबी विरासत से जुड़ी हुई है। इसी शाही विरासत और अपने बुज़ुर्गों की रवायत को आगे बढ़ाने की बात करते हुए अवध की रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाले सैयद मोहम्मद असद नवाब ने गरीबों और ज़रूरतमंदों की ख़िदमत को अपना मक़सद बताया है।

मोहम्मद अली शाह बादशाह की तीसरी पुश्त से ताल्लुक रखने वाले सैयद मोहम्मद असद नवाब का कहना है कि उनके बुज़ुर्गों ने मुश्किल दौर में अवाम की मदद के लिए बड़े इमामबाड़े, रूमी दरवाज़ा और कई तारीख़ी इमारतें तामीर कराईं। उनके मुताबिक़ नवाबी दौर में हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों के मज़हबी मक़ामात और ज़रूरतमंदों की मदद को अहमियत दी गई, जिससे लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब को मज़बूती मिली।

असद नवाब का कहना है कि उनके बुज़ुर्गों ने कब्रिस्तान, इमामबाड़े और इबादतगाहें तामीर कराने के साथ-साथ मंदिरों की भी मदद की। इसी रवायत को आगे बढ़ाते हुए वह आज भी मज़हबी मक़ामात पर ज़रूरत के मुताबिक़ सहूलियतें मुहैया कराने और गरीबों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह धार्मिक स्थलों पर कूलर समेत ज़रूरी सामान उपलब्ध कराने और ज़रूरतमंदों की हर मुमकिन मदद करने के लिए आगे आते रहेंगे।

असद नवाब अब पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात भी कह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अवाम का प्यार और भरोसा मिला तो गरीबों के लिए अस्पताल, स्कूल और आवास की सहूलियत मुहैया कराने की कोशिश करेंगे। गरीब बच्चों को मुफ़्त तालीम, ज़रूरतमंदों को मुफ़्त इलाज और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करना उनके एजेंडे में शामिल है।

उन्होंने कहा, “गरीबों की मदद करना हमारे बुज़ुर्गों की रवायत रही है और हम उसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। मेरे बुज़ुर्गों ने कब्रिस्तान बनवाए, इमामबाड़े बनवाए और मंदिरों की भी मदद की। मैं भी उसी रास्ते पर चलकर अवाम की ख़िदमत करना चाहता हूं।”

असद नवाब ने कहा कि वह उन लोगों में शामिल नहीं होना चाहते जो अवाम से वादे करके बाद में अपने वादों को भूल जाते हैं। उनका कहना है, “मैं सिर्फ़ वादे नहीं करना चाहता, बल्कि काम करना चाहता हूं। मैं नेता बनकर नहीं, बल्कि अवाम का भाई बनकर उनकी ख़िदमत करना चाहता हूं।”

उन्होंने कहा कि लखनऊ की भाईचारे, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को बरक़रार रखने और उसे और मज़बूत करने के लिए समाज के हर तबक़े को साथ लेकर चलना ज़रूरी है।

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