वित्त से बाजार तक मजबूत लिंकेज जरूरी, एमएसई के लिए वेंडर विकास पर जोर

by Vimal Kishor

लखनऊ,उत्तर:प्रदेश-समाचार10India। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय **‘सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए वेंडर विकास कार्यक्रम-2026’ का शुक्रवार को पीएचडी हाउस, गोमती नगर में समापन हुआ।

कार्यक्रम में 200 से अधिक एमएसई उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों, सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यक्रम के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील, आईएएस मुख्य अतिथि रहे। सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव, आईएएस और निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अतिरिक्त आयुक्त पवन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

एमएसएमई-डीएफओ कानपुर के निदेशक वीके वर्मा, आईईडीएस ने स्वागत संबोधन में कहा कि वेंडर विकास कार्यक्रम एमएसई इकाइयों को बड़े उद्योगों, पीएसयू और सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। इससे छोटे उद्यमों के लिए नए कारोबारी अवसर विकसित किए जा सकते हैं।सिर्फ ऋण नहीं, बाजार भी मिले : शशि भूषण लाल सुशीलमुख्य अतिथि शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि एमएसएमई के लिए वित्तीय सहायता को बाजार और स्थायी कारोबारी अवसरों से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि **सीएम युवा जैसी योजनाओं का उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नए उद्यमियों को बाजार और स्थायी व्यवसाय से जोड़ना भी होना चाहिए।उन्होंने बैंकों के माध्यम से योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार, फॉरवर्ड लिंकेज और वेंडर डेवलपमेंट पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत उद्यमियों को बड़े उद्योगों, संस्थागत खरीदारों और सरकारी खरीद से जोड़ने की जरूरत है। GeM के माध्यम से सरकारी खरीद में एमएसएमई और एससी/एसटी उद्यमियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी भी अधिक से अधिक उद्यमियों तक पहुंचनी चाहिए।उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। “सिर्फ ऋण देना पर्याप्त नहीं है—वित्त से उत्पादन, उत्पादन से बाजार, बाजार से ऑर्डर और ऑर्डर से स्थायी राजस्व तक पूरी कड़ी तैयार करनी होगी।”

इस दौरान प्रमुख सचिव ने एमएसई उद्यमियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं, सरकारी खरीद, भुगतान, कार्यशील पूंजी, वित्त और बाजार तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने TReDS सहित एमएसई के लिए उपलब्ध वित्तीय और संस्थागत व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की।निर्यात, वित्त और तकनीक पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव कार्यक्रम में निर्यात, व्यापार वित्त, जोखिम प्रबंधन, तकनीक, बौद्धिक संपदा और सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद पर तकनीकी सत्र हुए। GJEPC के चीफ मैनेजर संजय मदान ने निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों की जानकारी दी। ECGC कानपुर के शाखा प्रबंधक मोहम्मद शाहिद ने निर्यात कारोबार में जोखिम प्रबंधन पर प्रकाश डाला।EXIM Bank के रीजनल हेड आशीष सोनी ने निर्यात एवं व्यापार वित्त से जुड़े अवसरों की जानकारी दी। CSIR-CIMAP के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं हेड, बिजनेस डेवलपमेंट ग्रुप डॉ. आरके श्रीवास्तव ने अनुसंधान, तकनीक और नवाचार को उद्योग से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

आईपीआर अटॉर्नी नवदीप श्रीधर ने उत्पाद, ब्रांड, डिजाइन और नवाचारों के बौद्धिक संपदा संरक्षण के महत्व को समझाया। GAIL की सीनियर मैनेजर (कॉन्ट्रैक्ट्स एंड प्रोक्योरमेंट) ट्विंकल गौर ने खरीद और कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया तथा एमएसई के लिए कारोबारी अवसरों की जानकारी दी।शैलेन्द्र खरे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर विशेष सत्र में एमएसई के लिए डिजिटल तकनीक के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला। Ashok Leyland के Lead–Supply Chain, S&SC मनोज शुक्ला सहित विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।पीएसयू और सरकारी खरीद से जोड़ने पर जोर दो दिवसीय कार्यक्रम में एमएसई इकाइयों को पीएसयू की खरीद प्रक्रिया, GeM, वेंडर पंजीकरण, गुणवत्ता एवं मानकीकरण, तकनीकी आवश्यकताओं, निर्यात प्रोत्साहन, व्यापार वित्त, बौद्धिक संपदा और बाजार विस्तार की जानकारी दी गई।पहले दिन विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों ने अपनी खरीद आवश्यकताओं और वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी।

PSU-MSE B2B Meet एवं इंटरैक्शन के जरिए उद्यमियों को खरीदार संस्थानों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। दूसरे दिन वित्त, निर्यात, तकनीक, आईपीआर और बाजार विस्तार पर विशेषज्ञों के साथ संवाद हुआ।कार्यक्रम में PHDCCI के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक अतुल श्रीवास्तव तथा MSME-DFO कानपुर के सहायक निदेशक अमित बाजपेयी, नीरज कुमार और सोनिका रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, विशेषज्ञ और उद्यमी मौजूद रहे। कार्यक्रम ने एमएसई, पीएसयू, सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी संस्थानों के बीच संभावित कारोबारी सहयोग के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराया।

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