तापमान में गिरावट से कीट रोग की संभावना बढ़ी-महेश

by Vimal Kishor

लखनऊ,समाचार10India। जिला कृषि रक्षा अधिकारी’लखनऊ महेश चन्द्र’ ने बताया कि वर्तमान में तापमान में गिरावट एवं आर्द्रता वृद्धि के कारण रबी फसलों में लगने वाले सामयिक कीट रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है, जिसके द्रष्टिगत बचाव एवं प्रबन्धन हेतु कृषकों के मध्य व्यापक प्रचार-प्रसार कर जागरूक की आवश्यकता है।

गेहूँ की फसल में चैड़ी एवं सँकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे गुल्ली डण्डा, जंगली जई, चटरी-मटरी, बंथुआ एवं हिरनखुरी आदि की समस्या देखी जाती है। ’सँकरी पत्ती वाले खरपतवारों’ के नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्ल्यू पी की 33 ग्राम (2.5 यूनिट) अथवा क्लोडिनोफॉप प्रोपारजिल 15 प्रतिशत डब्ल्यू पी की 400 ग्राम मात्रा को 300-400 ली0 पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करें। खड़ी फसल में दीमक, गुजिया के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए।

माहू कीट के जैविक नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन 0.15 ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु डाईमैथोऐट 30 प्रतिशत ईसी अथवा थायोमेथॉक्साम 25 प्रतिशत डब्लूजी लगभग 750 ली0 पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पीली गेरूई नियंत्रण हेतु प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेअर की दर से लगभग 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

सरसों, तोरिया में आरा मक्खी, बालदार सूड़ी रोग के लिए डाईमैथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 1 ली0 मात्रा अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिड़काव करना चाहिए। लीफ माइनर एवं माहू जैविक नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन (नीम आयल) 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हेतु ऑक्सीडिमेटॉन-मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी की 1 लीटर अथवा डाईमैथोएट 30 प्रतिशत ईसी 1 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेअर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

’अल्टरनेरिया पत्ती धब्ब इस रोग के नियंत्रण हेतु मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेअर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। तुलासिता रोग रोग के नियंत्रण हेतु मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0 की 3.0 किग्रा0 मात्रा प्रति हेक्टेअर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

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