
लखनऊ,उत्तर.प्रदेश-समाचार10India। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत की सबसे बड़ी विविधीकृत सतत क्रिटिकल मिनरल्स एवं एडवांस्ड मटेरियल्स उत्पादक कंपनी लोहम (LOHUM) को लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन ‘एक पेड़ माँ के नाम’ में अपने सर्कुलर इकोनॉमी आधारित समाधानों को प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया गया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) तथा उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु लचीलापन और सतत औद्योगिक विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर लोहम के निदेशक तरुण सिंघल ने कहा, “हम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी तथा सतत औद्योगिक विकास के प्रति मजबूत संकल्प की सराहना करते हैं। राज्य की दूरदर्शी नीतियाँ लोहम जैसी कंपनियों को निवेश, विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और रीसाइक्लिंग के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं। इससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश भविष्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है और स्थिरता आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए हम राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।” भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है। ऐसे में जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए केवल नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्युतिकरण, ऊर्जा भंडारण, ई-मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों एवं सामग्रियों की मजबूत, स्वदेशी और सर्कुलर आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में सतत औद्योगिकीकरण और पर्यावरण-अनुकूल विकास पर बढ़ता जोर ऐसे उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। सम्मेलन के दौरान लोहम ने उन्नत रिकवरी, रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग तकनीकों से विकसित अपने सतत उत्पादों का प्रदर्शन किया। इनमें रिफाइंड मिनरल साल्ट्स, शुद्ध धातुएँ, कैथोड एक्टिव मटेरियल, मिक्स्ड रेयर अर्थ ऑक्साइड्स, रिकवर्ड कार्बन ब्लैक और ग्रेफाइट शामिल थे।
ये सामग्रियाँ बैटरियों, मैग्नेट्स, मोबिलिटी सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक अनुप्रयोगों और अगली पीढ़ी के विनिर्माण की आधारशिला हैं। प्रदर्शनी ने यह भी दर्शाया कि जीवन-चक्र पूरा कर चुके उत्पादों और औद्योगिक अपशिष्टों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से कितनी महत्वपूर्ण है। प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि रीसाइक्लिंग और सर्कुलर मटेरियल उत्पादन के माध्यम से संसाधन सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया जा सकता है, आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है, पर्यावरणीय प्रभाव घटाया जा सकता है तथा भारत के सतत विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, ई-मोबिलिटी और उन्नत विनिर्माण में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, सर्कुलर मटेरियल उत्पादन आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने, आयात निर्भरता कम करने और सतत औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश में लोहम की गतिविधियाँ जलवायु संरक्षण, संसाधन सुरक्षा, औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

