….लेकिन सरकार की राह आसान नहीं..शाश्वत तिवारी

by Vimal Kishor

 

समाचार10India-शाश्वत तिवारी,राजनीतिक विश्लेषक एवं स्वतंत्र पत्रकार। बंगाल में कांग्रेस का, CPM और TMC का सर्वनाश करने वाली बंगाल की जनता को भाजपा सरकार से रातों- रात सब कुछ ठीक होने की अपेक्षा करना, अभी बहुत जल्दबाजी होगी, अभी भाजपा को पर्याप्त समय देना होगा। जो बर्बादी 35 साल के CPM और 15 साल के ममता राज में हुई है, उसे पटरी पर लाने में समय लगेगा। एक घोषणा तो आज पीएम मोदी ने कर दी कि 5 लाख मुफ्त इलाज की सुविधा का ऐलान पहली ही कैबिनेट मीटिंग में कर दिया जायेगा।

पिछले 2021 के चुनाव में कांग्रेस और CPM को कोई सीट नहीं मिली थी लेकिन इस बार 2 – 2 सीट पर आगे हैं – मगर TMC तीसरे C वाली 215 से घट कर 80 पर आ गई यानी 136 सीट कम और दूसरी तरफ भाजपा 73 से 207 पर पहुंच गई यानी 130 सीट अधिक, मतलब जो ममता ने खोया वो भाजपा ने हासिल किया।

अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा को 44.8% वोट मिला है जबकि पिछले 2021 के चुनाव में 38.15% वोट था। यानी 6.65% ज्यादा, जबकि ममता का वोट पिछले 48.02% के मुकाबले इस बार 41.9% रह गया, जो 6.12% कम है।
मैंने पहले चरण की वोटिंग के बाद लिखे अपने  लेख में लिखा था “अगर दूसरे चरण में भी यही स्थिति रहती है और भाजपा के वोट 38% से 6 -7% भी बढ़ गया, तो भाजपा ही सरकार बनाएगी” और आज यही हुआ कि सत्ता भाजपा के हाथ में आ गई।
असम में भाजपा की सरकार तीसरी बार बनी है और पुडुचेरी में भी। हिमंता बिस्वा सरमा ने कमाल किया है जो भाजपा 102 सीट पर हैं और कांग्रेस कुल 21 पर, पवन खेड़ा के खुद कांग्रेस का “पेड़ा” बना दिया।

उधर सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया और कैंसर कहने वाली DMK खुद ख़त्म हो गई और चीफ मिनिस्टर स्टालिन स्वयं भी हार गए।
बंगाल चुनाव में एक बात मजेदार हुई जिससे एक पुरानी बात याद आ गई, आप सब को भी याद होगा, जब पीएम मोदी एक कुर्सी लेकर लक्षद्वीप की बीच पर बैठ गए और मालदीव निपट गया। बंगाल में मोदी जी “झालमुड़ी” क्या खाई, वो ममता बनर्जी को ही खा गई।

लेकिन बंगाल में जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे सरकार चलाना अंगारों पर चलने से कम नहीं होगा, क्योंकि 15 साल के ममता राज के चलते उसके लोग प्रशासन पर कब्ज़ा किए बैठे हैं, यहां पूरी पुलिस फाॅर्स ममता की मर्जी से चलती थी। ऐसे हालात में, ऐसे लोगों पर विश्वास करना अत्यंत कठिन होगा और इसलिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा, फिर बंगाल में घुसपैठियों की समस्या कम नहीं है।

वही, दूसरी ओर एक प्रमुख काम जो सबसे जरूरी है कि बांग्लादेश सीमा से लगते हुए बंगाल के 14 और असम के 3-4 जिलों को काट कर केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए, जहां से उन्हें बाहर करना आसान हो और बाहरी लोगों का अपने देश में घुसना कठिन हो जाए। पूरे केंद्र शासित प्रदेश को BSF के हवाले कर देना चाहिए।

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