यूएन के 3 मंचों पर भारत ने दिया सतत विकास, ऊर्जा बदलाव पर जोर

by Vimal Kishor

 

न्यूयॉर्क,समाचार10India-रिपोर्ट.शाश्वत तिवारी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने विभिन्न वैश्विक मंचों पर भारत का मजबूत पक्ष प्रस्तुत करते हुए सतत विकास, ऊर्जा बदलाव और बहुपक्षवाद (मल्टीलेटरलिज्म) में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है। न्यूयार्क में आयोजित अलग-अलग उच्चस्तरीय बैठकों में भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए समावेशी और बदलाव लाने वाले कदम उठाना समय की मांग है।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि ‘हाई-लेवल पॉलिटिकल फोरम’ में ‘सभी के लिए टिकाऊ भविष्य’ विषय पर आयोजित आम बहस में बयान देते हुए पी. हरीश ने ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए 2030 एजेंडा’ के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि एसडीजी को समय पर हासिल करने के लिए दुनिया को बदलाव लाने वाले और लीक से हटकर कदम उठाने होंगे। भारत इस दिशा में अपनी विकास प्राथमिकताओं को वैश्विक लक्ष्यों के साथ जोड़कर काम कर रहा है, ताकि समाज के हर वर्ग के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

इससे पहले, ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ (ऊर्जा बदलाव) के लिए जरूरी अहम खनिजों पर आयोजित यूएन की हाई-लेवल मीटिंग के प्लेनरी सेशन में हरीश ने कहा एक स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का पारदर्शी, लचीला और निष्पक्ष होना अनिवार्य है। भारत पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है और इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है।

मिशन के अनुसार भारतीय राजनयिक ने यूएन जनरल असेंबली की अनौपचारिक बैठक के दौरान ‘पैक्ट फॉर द फ्यूचर’ (भविष्य के लिए समझौता) की समीक्षा के सिलसिले में आयोजित मंत्रियों की राउंडटेबल बैठक में भी भाग लिया। ‘मल्टीलेटरलिज़्म को भविष्य के हिसाब से तैयार करने’ पर केंद्रित इस बैठक में उन्होंने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक शासन संरचनाओं और संयुक्त राष्ट्र में तात्कालिक सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुपक्षवाद को अधिक समावेशी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना होगा।

वैश्विक मंच पर दिए गए भारत के इन बयानों से साफ है कि नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और वैश्विक नीति सुधारों में एक अग्रणी और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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