‘गवर्नर’ की कहानी पर 5 साल तक चला शोध, विपुल शाह ने शुरुआत से ही मनोज बाजपेयी को माना था पहली पसंद

एक आइडिया से शुरू हुआ 'गवर्नर' का सफर, पांच साल की रिसर्च के बाद जानें कैसे बनी फिल्म

by Vimal Kishor

समाचार10India। मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा स्टारर फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ है। भारत के 1991 के आर्थिक संकट और उस दौर के अनसुने नायकों की कहानी को पर्दे पर लाने वाली इस फिल्म की शुरुआत एक दिलचस्प आइडिया से हुई थी। लेखक सुवेंदु भट्टाचार्य ने इस विषय को सबसे पहले सनशाइन पिक्चर्स के सामने रखा था। भारत के आर्थिक इतिहास के इस महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित अध्याय ने निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को तुरंत प्रभावित किया और उन्होंने इसमें एक दमदार सिनेमाई कहानी की संभावनाएं देखीं।

इसके बाद फिल्म की कहानी को विकसित करने का सफर शुरू हुआ, जो लगभग पांच वर्षों तक चला। इस दौरान सुवेंदु भट्टाचार्य और विपुल अमृतलाल शाह ने मिलकर कहानी की संरचना, स्क्रीनप्ले के विभिन्न ड्राफ्ट और 1990 के आर्थिक संकट के राजनीतिक, वित्तीय और भावनात्मक पहलुओं पर गहन काम किया। फिल्म को सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना तक सीमित न रखकर, उस दौर के मानवीय संघर्ष और फैसलों की गंभीरता को भी कहानी में पिरोने की कोशिश की गई।

जैसे-जैसे स्क्रिप्ट आगे बढ़ती गई, लेखक सौरभ भारत और रवि असरानी भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। दोनों ने विपुल अमृतलाल शाह के साथ मिलकर स्क्रीनप्ले को और मजबूत बनाया तथा अंतिम संवादों को आकार दिया। सूत्रों के मुताबिक, लेखकों ने इस फिल्म की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए वर्षों तक आर्काइव्स, पुराने समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स, सरकारी दस्तावेजों और उस समय की वास्तविक घटनाओं का गहराई से अध्ययन किया, ताकि कहानी तथ्यात्मक रूप से मजबूत और विश्वसनीय बनी रहे।

दिलचस्प बात यह है कि स्क्रिप्टिंग के शुरुआती दौर में ही विपुल अमृतलाल शाह को महसूस हो गया था कि इस किरदार के लिए मनोज बाजपेयी से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उनके अनुसार, इस भूमिका के लिए एक ऐसे अभिनेता की जरूरत थी जो शांत, बुद्धिमान, दृढ़ और भावनात्मक व्यक्तित्व को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतार सके। यही वजह रही कि मनोज बाजपेयी को इस महत्वपूर्ण किरदार के लिए सबसे पहले चुना गया। अब 12 जून 2026 को रिलीज होने जा रही ‘गवर्नर’ से दर्शकों को न सिर्फ एक रोमांचक सिनेमाई अनुभव बल्कि भारत के आर्थिक इतिहास के एक अहम अध्याय को करीब से जानने का अवसर भी मिलेगा।

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