पीएम मोदी के विदेश दौरों के दौरान साइन हुए 236 एमओयू

by Vimal Kishor

नई दिल्ली,समाचार10India-रिपोर्ट.शाश्वत तिवारी। वर्ष 2021 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान कुल 236 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक समझौते यूएई, अमेरिका, रूस, जापान और फ्रांस जैसे देशों के साथ हुए हैं। ये समझौते मुख्य रूप से रक्षा, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और द्विपक्षीय व्यापार जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में दी।

दरअसल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी द्वारा विदेश मंत्रालय के समक्ष 2021 से अभी तक की प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित प्रश्न पूछा गया था। इसका जवाब देते हुए विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने सदन के सामने कुछ आंकड़े पेश किए, जिनसे पता चला कि पीएम मोदी के पिछले करीब चार साल के विदेशी दौरों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित 236 एमओयू साइन किए गए।

विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार मार्गेरिटा ने अपने जवाब में कहा इन समझौता ज्ञापनों के कार्यान्वयन की स्थिति की निगरानी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा नियमित रूप से की जाती है, इसमें यदि कोई विलंब होता है, तो उसके कारणों की भी समीक्षा की जाती है। इन समझौता ज्ञापनों की समीक्षा विभिन्न स्थापित तंत्रों, जैसे कि संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी), सहयोग के लिए संयुक्त आयोग (जेसीसी) आदि, के माध्यम से द्विपक्षीय स्तर पर की जाती है, इसके अतिरिक्त अन्य द्विपक्षीय संवाद तंत्रों के माध्यम से भी इनकी समीक्षा की जाती है।

वहीं दूसरी ओर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल 462.58 करोड़ रुपये का खर्च आया है। 43 देशों तक फैली इन यात्राओं में कई अहम जगहों पर बार-बार की गई यात्राएं भी शामिल हैं। इस अवधि में अमेरिका की यात्रा पर कुल विदेशी यात्रा खर्च का 16 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ। इसके बाद जापान और फ्रांस का स्थान आता है, जिन पर लगभग 9-9 प्रतिशत खर्च हुआ।

बता दें कि दुनिया के विभिन्न देशों का दौरा कर भारत की क्षमताओं और प्राथमिकताओं को सामने रखना तथा सहयोग और साझेदारी को मजबूत करना प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की एक प्रमुख विशेषता रही है। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति को मजबूत करना रहा है।

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