अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का बजेगा डंका, इसरो का SSLV अगले महीने भर सकता है दूसरी उड़ान, चंद्रयान-3 भी तैयार, जानें पूरी प्लानिंग
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यदि यह उड़ान सफल रही तो इसरो को 10 से 500 किलोग्राम तक वजन के छोटे उपग्रहों के लिए मांग आधारित प्रक्षेपण सेवा शुरू करने का अवसर मिलेगा। इस उड़ान की सफलता इसरो को बड़ी कामयाबी दिलाएगी।