लखनऊ,समाचार10 India। अमेज़न इंडिया की किताबों और खिलौनों की श्रेणी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बन गया है। राज्य में सीखने पर केंद्रित खरीदारी प्रवृत्तियों के चलते लगातार 3 वर्षों से साल-दर-साल दोहरे अंकों की प्रभावशाली वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ उभरते शहरों में भी ग्राहक सीखने और मनोरंजन के उद्देश्य से किताबों में तेजी से निवेश कर रहे हैं।
अमेज़न इंडिया में किताबें और खिलौनों के निदेशक, राजर्षि गुइन ने कहा, “हमें खुशी है कि उत्तर प्रदेश के ग्राहक Amazon.in पर किताबों और खिलौनों को बड़े उत्साह से अपना रहे हैं। यह धारणा गलत साबित हो रही है कि आज की डिजिटल पीढ़ी ने पढ़ाई और भौतिक खेलों से दूरी बना ली है। उत्तर प्रदेश में हमारी वृद्धि इसकी एक अलग कहानी बयां करती है।
ग्राहक सोच-समझकर उन संसाधनों का चयन कर रहे हैं, जो लंबे समय तक मूल्य प्रदान करते हैं, चाहे वह परीक्षा की तैयारी के लिए सामग्री हो, क्षेत्रीय भाषाओं के लोकप्रिय साहित्यिक शीर्षक हों या कौशल-विकास वाले खिलौने। खास बात यह है कि यह प्रवृत्ति अब पूरे उत्तर प्रदेश में फैल रही है, क्योंकि हमारे कई नए ग्राहक उभरते शहरों से भी जुड़ रहे हैं। इस भौगोलिक विस्तार को पूरे राज्य में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री और विकासात्मक खिलौनों की आसान उपलब्धता के माध्यम से संभव बनाया जा रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के पाठकों और शिक्षार्थियों को बढ़ावा मिल रहा है।”
प्रेरणा बढ़ा रही है किताबों की वृद्धि
उत्तर प्रदेश में शैक्षणिक और मनोरंजन दोनों क्षेत्रों में एक समृद्ध पाठन संस्कृति फल-फूल रही है। राज्य में हिंदी और उर्दू साहित्य की सबसे अधिक मांग है, जहां कविता संग्रहों को खास लोकप्रियता मिल रही है। जौन एलिया सबसे ज्यादा बिकने वाले उर्दू लेखक बनकर उभरे हैं, जबकि धर्मवीर भारती का उपन्यास “गुनाहों का देवता” हिंदी में सबसे अधिक बिकने वाला उपन्यास है। यह साहित्यिक विरासत शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ कदमताल कर रही है, क्योंकि बिकने वाली हर तीन में से एक किताब इंजीनियरिंग, सरकारी परीक्षाओं, मेडिकल या यूपीएससी की तैयारी के लिए होती है।
अब पारंपरिक शहरी केंद्रों से इतर पाठन का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। बरेली, मथुरा, मुज़फ़्फरनगर, आज़मगढ़ और जौनपुर जैसे उभरते शहर नए ग्राहकों की संख्या में 20% से अधिक की वृद्धि कर रहे हैं। लखनऊ इस बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जहां उच्च शिक्षा, फिक्शन और बच्चों की किताबों में मजबूत वृद्धि के साथ यह एक विविध पाठन केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।
यह प्रवृत्ति अब खिलौनों तक भी पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश में बिकने वाले हर दो में से एक खिलौना या तो बिल्डिंग सेट, गेम, पहेली, आउटडोर एक्टिविटी खिलौना या एसटीईएम उत्पाद होता है। लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाज़ियाबाद और वाराणसी जैसे शीर्ष 5 शहरों में मजबूत मांग बनी हुई है, जहां दो अंकों की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं, मथुरा, मुज़फ़्फरनगर और बरेली जैसे 20 उभरते शहर अब यूपी की कुल खिलौना मांग में 40% का योगदान दे रहे हैं।
“इलेक्ट्रॉनिक सिटी” के रूप में प्रसिद्ध गाज़ियाबाद इलेक्ट्रिक राइड-ऑन खिलौनों का प्रमुख केंद्र बन गया है, जहां इस श्रेणी में साल-दर-साल 20% की वृद्धि हो लेगो और हैस्ब्रो जैसी शीर्ष ब्रांडों के प्रीमियम खिलौनों (10,000 रुपये और उससे अधिक) की मांग तेजी से बढ़ रही है। घरेलू डी2सी ब्रांड जैसे स्किलमैटिक्स, स्मार्टिविटी और इमैजिमेक भी शानदार वृद्धि दर्ज कर रहे हैं, जबकि प्रीमियम आउटडोर खिलौनों के ब्रांड लूसा की मांग पिछले वर्ष में दोगुनी हो गई है।
मनोरंजन और शैक्षणिक सीखने पर केंद्रित खरीदारी ग्राहकों को भौतिक किताबों और इंटरएक्टिव खिलौनों में निवेश के लिए प्रेरित कर रही है।ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा और सरलता के चलते लखनऊ एक विविध पाठन केंद्र के रूप में उभर रहा है, जिससे आज़मगढ़, जौनपुर, गाज़ीपुर और रायबरेली जैसे बढ़ते शहरों में नए ग्राहकों की संख्या में 20% से अधिक की वृद्धि हो रही है। विकास-उन्मुख खिलौनों में बढ़ती रुचि के कारण एसटीईएम उत्पादों, पहेलियों और कौशल-विकास वाले खेलों की मांग तेजी से बढ़ रही है