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काबुल, 06 सितंबर। अफगानिस्तान में पहले बहुत भ्रष्टाचार था। लेकिन आजादी थी। मर्जी से जीने की आजादी। आम आदमी को कमाने खाने की आजादी। अब भ्रष्टाचार तो खत्म हो गया लेकिन आजादी भी चली गयी। अब जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं।